Category: कविता

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हाँ मैंने माना, मैं तुम जैसी नहीं
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हाँ मैंने माना, मैं तुम जैसी नहीं

गलत को कहूँ गलत, कहूँ सही को सही, हाँ मैंने माना, मैं तुम जैसी नहीं मन में जो मेरे बात है, है जुंबा पर वही, हाँ मैं फिर से कहती हूँ, के मैं तुम जैसी नहीं ना किसी से आगे जाने की होड़, न करना किसी का पीछा, पर छोडू न उसको मैं कभी भी,...

रुक मत राही रे, तू चल अकेला
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रुक मत राही रे, तू चल अकेला

रुक मत राही रे, तू चल अकेला बड़ा कठिन समय है ये बड़ी कठिन है बेला ।। किसका ढूंढें सहारा, क्यूँ बनता है बेचारा फिरे क्यूँ मारा मारा, पागल, प्रेमी बंजारा कोई काम न आयेगा, बैरी जग सारा ये ठगों की बस्ती है, है ठगी का मेला रुक मत राही , तू चल अकेला बड़ा...

हाँ मैंने देखा है
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हाँ मैंने देखा है

हिंदी कविता मैंने देखा है बदलते हुए रिश्तों को , गैरों में छुपे फरिश्तों को ईमान के सस्तों को, दूसरों पे हस्तों को । मैंने देखा है सपनों की उड़ान को, खुशियों के बागान को इंसानों में छुपे शैतान को, किस्मत के इन्तहान को। मैंने देखा है अरमानों की बस्ती को, कुचलती हुई हस्ती को...

काश वो दिन लौट आयें कहीं से
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काश वो दिन लौट आयें कहीं से

वो बचपन की यादें, वो बचपन के साथी वो नन्हीं-सी गुड़िया, वो घोड़े-बाराती॥ वो पापा की थपकी , वो मम्मी की लोरी वो मामा का कन्धा , वो चाचा की गोदी॥ वो नानी सुनाती परी की कहानी वो दादी हमें अपने संग में घुमाती॥ वो झूले की डाली, वो आंगन की मिट्टी वो छुट्टी की...