रुक मत राही, बस चलता रह

रुक मत राही रे

रुक मत राही रे, तू चल अकेला

बड़ा कठिन समय है ये बड़ी कठिन है बेला ।।

किसका ढूंढें सहारा, क्यूँ बनता है बेचारा

फिरे क्यूँ मारा मारा, पागल, प्रेमी बंजारा

कोई काम न आयेगा, बैरी जग सारा

ये ठगों की बस्ती है, है ठगी का मेला

रुक मत राही रे, तू चल अकेला

बड़ा कठिन समय है ये, बड़ी कठिन है बेला ।।

चलना मत आँखें मींचे, रहना मत सबके पीछे

कोई टांग जो तेरी खींचे, कर दे कदमों के नीचे

ये लोभी दुनिया है, बस अपना ही सींचे

वो राह नहीं चुननी, जहाँ चले ये रेला

रुक मत राही रे, तू चल अकेला

बड़ा कठिन समय है ये, बड़ी कठिन है बेला ।।

तू क्या है तूने ना जाना, मंजिल को ना पहचाना

तकदीर का ताना बाना, तुझको ही है सुलझाना

किसको है परे करना, किसको अपनाना

लेना है तुझे निर्णय, बड़ा कठिन ये खेला

रुक मत राही रे, तू चल अकेला

बड़ा कठिन समय है ये, बड़ी कठिन है बेला ।।

हिंदी कविता रुक मत राही रे
लेना है तुझे निर्णय

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