अपने मालिक स्वयं बनो

यदि  मैं तुम्हें  बता सकता कि तुम मुझे कितना शर्मिंदा महसूस कराते हो तो तुम कभी मेरी आंखों में देख नहीं पाते

सबसे अच्छी सीख, जो मुझे आज तक मिली  है वह यह है कि “ये तुम्हारी जिंदगी है, दूसरों के शब्दों में   मत  उलझो” l  हम में से अधिकांश दूसरों के शब्दों और व्यवहार से प्रभावित हो जाते हैं l   हम दूसरे लोगों के दृष्टिकोण और विचारों के अनुसार अपने  मूड को बदल लेते हैं l क्या अपने व्यवहार, मन की स्थिति, जीवन जीने का तरीका, सोचने की प्रक्रिया  एवं कार्य करने का तरीका सिर्फ इसलिए बदल लेना चाहिए, क्योंकि दूसरों को लगता है कि यह गलत है?  नहीं,  ऐसा करना उचित नहीं है l  हम अलग अलग व्यक्तित्व है l हमारे पास अपनी विभिन्न मन-स्थितियां,  सोच, मत, दृष्टिकोण, पसंद, नापसंद,  सपने, उद्देश्य,  विकल्प, महत्व, आदर्श और सिद्धांत है l

  कई बार  हमारे   करीबी लोग  हमारे प्रति आशा के विपरीत  व्यवहार व कार्य करते हैं l कभी कभी वह हमसे वह कार्य कराना चाहते हैं, जिसकी गवाही हमारी अंतरात्मा नहीं देती l  लेकिन फिर भी हम वह कार्य करते हैं क्योंकि हम सबको खुश रखना चाहते हैं l  हम नहीं चाहते कि किसी को बुरा लगे l हमें लगता है कि  यदि हम कार्य करने से इंकार कर देंगे तो यह हमारे अपनों  का अपमान होगा l

 वह कौन हैं : जिन्हें दूसरों के जीवन में हस्तक्षेप करने में मजा आता है l

 वह व्यक्ति जो स्वयं से संतुष्ट नहीं है, और अपनी तुलना दूसरों से करता है l वह व्यक्ति जो सोचता है, कि यदि उसके जीवन में कुछ अच्छा नहीं हो रहा है तो उसे दूसरों को परेशान करना चाहिए l जो दूसरों को तरक्की करते नहीं देख सकता l वह व्यक्ति जिसे अपनी काबिलियत और योग्यताओं पर भरोसा नहीं है और जिसके अंदर जीतने  का हौसला नहीं है l जो अपने समय, रिश्तों कार्यों और ज्ञान में तालमेल नहीं बैठा पाता तथा जिसे दिखावा पसंद है और जो बनावटी जिंदगी जीता है और  अस्थाई खुशियों की तलाश में रहता है l वह व्यक्ति जो हमेशा नकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है और  जो खुद से अनजान है l

खुद को जाने :  स्वयं पर स्वामित्व पाने का यह पहला कदम है l  खुद को पहचाने, अपने अंदर झांके, अपने  सकारात्मक पहलू को समझें l  एक  पैन और पेपर लेकर एक शांत स्थान पर बैठ जाएं और अपनी रुचियों, भयों, भटकावों और योग्यताओं को ज्ञात करने की कोशिश करें एवम जो भी विचार आपके मस्तिष्क में दौड़ रहे हैं, उन्हें पेपर पर लिखते रहें l उसके बाद उन्हें पढ़कर यह जानने की कोशिश करें कि किस प्रकार, आप अपनी कमजोरियों को हराकर अपनी योग्यता को निखार सकते हैं l अपनी वास्तविक ख़ुशी का ज्ञान सिर्फ और सिर्फ हमें ही होता है l

खुद को बदलने  के स्थान पर  खुद में सुधार लाने का प्रयत्न करें l  कोई भी स्थिति तुरंत नहीं बदली जा सकती दृष्टिगत बदलाव आने में थोड़ा समय लगता है l अगर हम किसी भी परिस्थिति को अचानक बदलने की कोशिश करें तो इसमें तो इसमें अधिक  प्रयास की आवश्यकता होगी, साथ ही शारीरिक तथा मानसिक  हानि भी होगी परन्तु यदि हम, स्वयं में सुधार लाने का प्रयास करें तो इसमें थोड़ा समय लगेगा किंतु हम स्वयं को अधिक योग्य बना सकेंगे l एक नियमित और निरंतर सुधार बहुत सारे लाभों के साथ हमारे अंदर एक बड़ा बदलाव ला सकता है l इसे एक बहुत ही साधारण से उदाहरण के द्वारा समझेंगे एक व्यक्ति है जो अपने मोटापे से परेशान है और  वह अपना वजन कम करना चाहता है जिससे कि वो स्वस्थ रह सके और आकर्षक व्यक्तित्व प्राप्त कर सके l  अब यदि वह अचानक से जिम जाना शुरू कर दे और डाइट चार्ट के अनुसार खाना शुरू कर दे, तो यह निश्चित है कि बहुत जल्दी वह अपने वजन कम करने के प्लान को त्याग देगा l

कोई भी व्यक्ति जिसे रात को देर से सोने की आदत है, सुबह जल्दी नहीं उठ सकता l यदि नींद पूरी नहीं होगी, तो स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा l अचानक से  अपनी नियमित खुराक से कम कैलोरी लेना शुरू कर दे तो उसे कमजोरी और  आलस्य का सामना करना करना पड़ेगा, लेकिन यदि प्रत्येक सप्ताह आधे घंटे का छोटा सा बदलाव अपने  सोने के और जागने के  समय में करे , तो निश्चित ही वह कुछ महीनों में, सही समय पर सोना व जागना शुरू कर देगा l ठीक उसी प्रकार भोजन की मात्रा कम करने के स्थान पर भोजन के प्रकार में बदलाव करें l अर्थात् अधिक जंक फ़ूड के स्थान पर हरी सब्जियों का जूस , फलों का जूस और सलाद अपनी नियमित भोजन प्रणाली में शामिल करें l अकस्मात् कम की गई कैलोरी की मात्र आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव दाल सकती है किन्तु पौष्टिक भोजन आपको उचित पोषण प्रदान करता है l अधिक व्यायाम न करें बल्कि उसके स्थान पर अपने रोजमर्रा के कम अपने हाथों से करें और नजदीकी स्थानों पर छोटे मोटे कार्यों के लिए गाड़ी के स्थान पर पैदल जाना शुरू करें l इससे न सिर्फ आपका वजन कम होगा साथ ही आप अपनी नियमित दिनचर्या के कार्यों को भी अधिक कुशलता से संपन्न कर पाएंगे l

सबकी बात सुने, किन्तु व्यवहार अपने अनुसार करें  l एक अच्छा श्रोता होना बहुत अच्छी बात है, लेकिन दूसरों से एकदम प्रभावित न हो l सही और गलत के बीच भेद करने के लिए अपने मष्तिष्क के सभी भावों का प्रयोग करें l क्या हो रहा है और वास्तव में क्या होना चाहिए के मध्य के अंतर को समझें l प्रत्येक व्यक्ति के अपना जीवन जीने के कुछ उसूल व सिद्धांत होते हैं l ये उसूल और सिद्धांत ही उसके व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता को निर्धारित करते हैं l किसी भी दबाव, लालच एवम बहकावे में आकर अपने सिद्धांतों को छोड़ना नहीं चाहिए l

दूसरों को अपने जीवन में उनके शब्दों और विचारों के माध्यम से जहर मत घोलने दें l अपनी जीवन यात्रा की ख़ूबसूरती की सच्चाई के साथ मजबूती से खड़े रहें उन्हें किसी के वैध करार देने की आवश्यकता नहीं है  l

आत्मनिर्भर बनिए.. दूसरों पर आश्रित होने से आप उनकी इच्छानुसार  चलने के लिए बाध्य हो जाते हैं l अपने कार्यों को निर्धारित समय में स्वयं करने की कोशिश करें l दूसरों की बजाए स्वयं से उम्मीदें बढ़ाएं l यदि आप बिना अनुरोध के किसी की सहायता कर रहे हैं तो याद रखिये ये आपकी इच्छा है l इसके बदले में वह व्यक्ति भी आपके लिए पेबैक करने को मजबूर नहीं होगा l वह उसकी इच्छा पर निर्भर होगा. ठीक वैसे ही जैसे की आपके कार्यालय में आपके द्वारा निर्धारित समय से अधिक बिताया गया समय केवल तभी आपको ओवरटाइम का हकदार बनाएगा जब उसकी मांग कार्यालय के किसी  कार्य के संपादन के लिए हो और जिसके लिए आपके अधिकारी ने आदेश दिया हो, अन्यथा आप २४ घंटे वहाँ बैठे रहिये कोई मायने नहीं रखता l

दूसरों के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें. दूसरों पर शासन करने की कोशिश न करें l याद रखिये, आपके पास अधिकार जमाने के लिए आपका शरीर, शासन करने के लिए आपका मष्तिष्क , नियंत्रण करने के लिए आपकी जीभ एवं निर्धारण करने के लिए आपके कर्म हैं l

 “अपने व्यक्तित्व का सम्मान करें, और दूसरों के व्यक्तित्व का भी सम्मान करें , किसी के जीवन में हस्तक्षेप न करें और किसी को भी अपने जीवन में हस्तक्षेप करने की अनुमति न दें l केवल तभी आप एक दिन आध्यात्म को प्राप्त हो सकेंगे l ”                                                                       – ओशो

 अपनी वास्तविकता का त्याग किये बिना बदलावों को स्वीकार करें – नए प्रचलन को अवश्य अपनाये किन्तु अपना चलन बरकरार रखें. मैं तो यह कहूँगी की खुद ही प्रचलन बन जाएँ , जिसे लोग अपने चलन में लायें l दूसरों से अपने आचरण में केवल सकारात्मक विचारों को ग्रहण करें l

आशावादी बने l हमेशा सकारात्मक सोचें l उम्मीद रखें कि हमारा आने वाला कल आज से बेहतर होगा l अपने आस पास उन लोगों को रखे जिनकी उपस्थिति आपको साहसी और उत्साहित रहने की प्रेरणा देती है l जो आपके अच्छे कार्यों की सराहना करते हैं , और विपत्ति में साथ नहीं छोड़ते, वही आपके असल शुभ्चितक हैं l

किसी ने खूब कहा है कि, मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती यह थी कि मैंने लोगों को अपने जीवन में उनकी योग्यता से अधिक स्थान दिया l

अपनी हार स्वीकार करना सीखो l खुद का मालिक बनने की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है l यह कठिन है किन्तु नामुमकिन नहीं l हमारी अनुमति के बिना हमे कोई हानि नहीं पहुंचा सकता l यदि हम अपनी गलतियों को स्वीकार करना सीख लें तो आने वाले समय में , हमारे द्वारा गलतियाँ करने की सम्भावना कम हो जाएगी l

इस प्रकार हम अपने जीवन को कुछ गिनती के सालों के रूप में नहीं बल्कि एक खुशनुमा अनुभव के रूप में पायेंगे l

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