हाँ मैंने माना, मैं तुम जैसी नहीं

हाँ मैंने माना, मैं तुम जैसी नहीं

गलत को कहूँ गलत, कहूँ सही को सही, हाँ मैंने माना, मैं तुम जैसी नहीं मन में जो मेरे बात है, है जुंबा पर वही, हाँ मैं फिर से कहती हूँ, के मैं तुम जैसी नहीं ना किसी से आगे जाने की होड़, न करना किसी का पीछा, पर छोडू न उसको मैं कभी भी, जो दिखलाये मुझको नीचा दूं मैं हौसला उन सभी को, जिनका मन है कच्चा, पर माफ़ न करती उसको, जिसने पैर मेरा खींचा है स्वयं से मेरी प्रतिस्पर्धा, चाहूं खुद की बेहतरी, हाँ मैंने माना के मैं, तुम जैसी नहीं न दिखावा मुझे पसंद, न...

रुक मत राही रे, तू चल अकेला

रुक मत राही रे, तू चल अकेला

रुक मत राही रे, तू चल अकेला बड़ा कठिन समय है ये बड़ी कठिन है बेला ।। किसका ढूंढें सहारा, क्यूँ बनता है बेचारा फिरे क्यूँ मारा मारा, पागल, प्रेमी बंजारा कोई काम न आयेगा, बैरी जग सारा ये ठगों की बस्ती है, है ठगी का मेला रुक मत राही , तू चल अकेला बड़ा कठिन समय है ये, बड़ी कठिन है बेला ।। चलना मत आँखें मींचे, रहना मत सबके पीछे कोई टांग जो तेरी खींचे, कर दे कदमों के नीचे ये लोभी दुनिया है, बस अपना ही सींचे वो राह नहीं चुननी, जहाँ चले ये रेला रुक मत...

हाँ मैंने देखा है

हाँ मैंने देखा है

हिंदी कविता मैंने देखा है बदलते हुए रिश्तों को , गैरों में छुपे फरिश्तों को ईमान के सस्तों को, दूसरों पे हस्तों को । मैंने देखा है सपनों की उड़ान को, खुशियों के बागान को इंसानों में छुपे शैतान को, किस्मत के इन्तहान को। मैंने देखा है अरमानों की बस्ती को, कुचलती हुई हस्ती को अल्हड़पन की मस्ती को, खुद को बदलने की जबरदस्ती को । मैंने देखा है नाकामी पे हाथ मलतों को, गैरों की खुशियों से जलतों को अपनी भावनाएं कुचलतों को, परिस्थितियों में ढलतों को। मैंने देखा है हालातों से भागतों को, दूसरे की थाली में झांकतों...

इन 6 तरह के व्यक्तियों से हमेशा दूर रहें

इन 6 तरह के व्यक्तियों से हमेशा दूर रहें

अपने जीवन में हम कई तरह के व्यक्तियों से मिलते हैं  अपने परिवार, मित्रों और सगे सम्बन्धियों के अतिरिक्त भी कई व्यक्ति हमारे जीवन में आते हैं कुछ हमारी ज़िन्दगी में कड़वे अनुभव और बुरी यादें दे जाते हैं और कुछ हमारा जीवन संवार देते हैं और हमारे जीवन का अहम् हिस्सा बन जाते हैं जो व्यक्ति हमें क्षति पंहुचाते हैं उन्हें हम भूल जाना चाहते हैं और यदि वे हमें कहीं मिल जाते हैं तो हम उनसे बच निकलना चाहते हैं जीवन में सही व्यक्तियों की पहचान करना बहुत जरुरी होता है यदि आप लोगों को नहीं पहचानेंगे तो,...

अपना अपना नजरिया

अपना अपना नजरिया

किसी भी एक परिस्थिति में या किसी घटना के विषय में, हर व्यक्ति का दृष्टिकोण अलग – अलग होता है। और कई बार दो लोगों के नजरिये में समानता भी पाई जाती है। वास्तव में हमारे व्यावहार, हमारे व्यक्तित्व तथा हमारे आचरण पर हमारी परवरिश, वातावरण एवम हमारे आस पास के लोगों के व्यक्तित्व का प्रभाव पड़ता है। हम अपनी पहली शिक्षा अपने माता पिता, परिवार और रिश्तेदारों से प्राप्त करते हैं, फिर कुछ आदतें अपने दोस्तों और पडोसियों से सीखते हैं, अपने अध्यापक से और फिर इस समाज से और अंत में अपने हालातों से।। इन सबके अलावा एक...

दोहरा व्यक्तित्व

दोहरा व्यक्तित्व

आज की इस दुनिया में अधिकांश लोग दोहरे व्यक्तित्व के साथ जीते हैं l दोहरा व्यक्तित्व अर्थात, दो चरित्र एक समाज में दिखावे के लिए एवं एक वास्तविक जो उसे ईश्वर ने प्रदान किया हैl ऐसे व्यक्ति समाज में अपने झूठे दिखावे औए बनावटी अच्छाई का सहारा लेकर एक अच्छी छवि बना लेते हैंl ये लोग जब भी चार लोगों के बीच में बैठते हैं तो बड़ी बड़ी बातें करते हैंl अपने झूठे उसूलों एवं आदर्शों का बखान करते हैं l सामने वाले व्यक्ति को प्रतीत होता है, कि वास्तव में वह एक आदर्श चरित्र के साथ बैठा हैl जिसके...

काश वो दिन लौट आयें कहीं से

काश वो दिन लौट आयें कहीं से

वो बचपन की यादें, वो बचपन के साथी वो नन्हीं-सी गुड़िया, वो घोड़े-बाराती॥ वो पापा की थपकी , वो मम्मी की लोरी वो मामा का कन्धा , वो चाचा की गोदी॥ वो नानी सुनाती परी की कहानी वो दादी हमें अपने संग में घुमाती॥ वो झूले की डाली, वो आंगन की मिट्टी वो छुट्टी की घंटी , वो मामा को चिट्ठी॥ काश वो दिन लौट आयें कहीं से…………. वो छुपना – छुपाना , वो हँसना – हँसाना वो गिरना – संभालना, वो फिर दौड़ जाना॥ किसी की ना सुनना, बस अपनी चलाना वो हरदम बस खेल का, ढूंढे बहाना॥ वो...

अपने मालिक स्वयं बनो

अपने मालिक स्वयं बनो

यदि  मैं तुम्हें  बता सकता कि तुम मुझे कितना शर्मिंदा महसूस कराते हो तो तुम कभी मेरी आंखों में देख नहीं पाते सबसे अच्छी सीख, जो मुझे आज तक मिली  है वह यह है कि “ये तुम्हारी जिंदगी है, दूसरों के शब्दों में   मत  उलझो” l  हम में से अधिकांश दूसरों के शब्दों और व्यवहार से प्रभावित हो जाते हैं l   हम दूसरे लोगों के दृष्टिकोण और विचारों के अनुसार अपने  मूड को बदल लेते हैं l क्या अपने व्यवहार, मन की स्थिति, जीवन जीने का तरीका, सोचने की प्रक्रिया  एवं कार्य करने का तरीका सिर्फ इसलिए बदल लेना चाहिए,...